आ गए यहां जवान कदम
Aa gaye yahan jawan kadam yaha jawa kadam
आ गए यहां जवान कदम, मंज़िलों को ढूंढते हुए
गीत गा रहे हैं आज हम, रागिनी को ढूंढते हुए
अब दिलों में ये उमंग है, ये जहां नया बसाएंगे
ज़िंदगी का तौर आज से, दोस्तों को हम सिखाएंगे
फूल हम नए खिलाएंगे, ताज़गी को ढूंढते हुए
आ गए यहां जवान कदम…
रोग की तरह दहेज है, आज देश के समाज में
है तबाह आज आदमी, लूट पर टिके समाज में
हम समाज भी बनाएंगे, आदमी को ढूंढते हुए
आ गए यहां जवान कदम…
फिर ना जल सके कोई दुल्हन, ज़ोर-ज़ुल्म का ना हो निशां
मुस्कुरा उठे धरा-गगन, हम रचेंगे ऐसी दास्तां
यूं सजाएंगे वतन को हम, हर खुशी को ढूंढते हुए
या गए यहां जवान कदम…