अपने लिए जिए तो क्या जिएतू जी ऐ दिल ज़माने के लिए
Apne liye jiye to kya jiye
अपने लिए जिए तो क्या जिएतू जी ऐ दिल ज़माने के लिए
हिम्मत बुलंद है अपनी, पत्थर सी जान रखते हैं
कदमों तले ज़मीन तो क्या, हम आसमान भी रखते हैं
गिरते हुए को उठाने के लिए, तू जी ऐ दिल…
बाज़ार से ज़माने के, कुछ भी ना हम खरीदेंगे
हां, बेच कर खुशी अपनी, औरों के गम खरीदेंगे
बुझते दिये को जलाने के लिए, तू जी ऐ दिल…
अपनी खुदी को जो समझा, उसने खुदा को पहचाना
आज़ाद फितरत-ए-इंसान, अंदाज़ क्यों गुलामाना
सर ये नहीं है झुकाने के लिए, तू जी ऐ दिल…
अपने लिए जिए तो क्या जिए
नाकामियों से घबरा के, तू क्यों उदास होता है
हम हमसफ़र बनें तेरे, तू क्यों उदास होता है
हंस तू सदा, हंसाने के लिए, तू जी ऐ दिल…
चल माहताब लेकर चल, चल आफताब लेकर चल
तू अपनी एक ठोकर में, सौ इंकलाब लेकर चल
जुल्म-ओ-सितम मिटाने के लिए, तू जी ऐ दिल…