एक हमारी, और एक उनकी, मुल्क में हैं आवाज़ें दो
ek hamari aur ek unki mulk mein hai awajein do awaje do
एक हमारी, और एक उनकी, मुल्क में हैं आवाज़ें दो
अब तुम पर है, कौन सी तुम आवाज़ सुनो, तुम क्या मानो
हम कहते हैं जात-धर्म से इंसान की पहचान गलत
वो कहते हैं सारे इंसान एक हैं ये ऐलान गलत
अब तुम पर है…
हम कहते हैं नफ़रत का जो हुक्म दे वो फरमान गलत
वो कहते हैं ये मानो तो सारा हिंदोस्तान गलत
अब तुम पर है…
हम कहते हैं भूल के नफ़रत प्यार की कोई बात करो
वो कहते हैं खून-खराबा होता है तो होने दो
अब तुम पर है…
हम कहते हैं इंसानों में इंसानों से प्यार रहे
वो कहते हैं हाथों में त्रिशूल रहे तलवार रहे
अब तुम पर है…
हम कहते हैं बेघर-बेदर लोगों को आबाद करो
वो कहते हैं भूले-बिसरे मंदिर-मस्जिद याद करो
अब तुम पर है…