इरादे कर बुलन्द
irade kar buland
इरादे कर बुलन्द अब रहना शुरू करती तो अच्छा था
तू सहना छोड़कर कहना शुरू करती तो अच्छा था
सदा औरों को खुश रखना बहुत ही खूब लेकिन
खुशी थोड़ी तू अपने को भी दे पाती तो अच्छा था
तेरी आखों में हैं आंसू, तेरे सीने में हैं शोले
तू इन शोलों में अपने गम जला लेती तो अच्छा था
है सर पर बोझ जुल्मों का, तेरी आंखे सदा नीची
कभी आंखें उठा तेवर दिखा देती तो अच्छा था
तेरे माथे पे ये आंचल, बहुत ही खूब है लेकिन
तू इस आंचल का इक परचम बना लेती तो अच्छा था