जागा सारा संसार
jaga sara samsara jaga sara samsara jAgA sArA saMsAra | जागा सारा संसार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
फूटी किरण लाल खुलता है पूरब का व्दार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
अंग़डाई लेती$ ये धरती उठी है
सदियों से ठ़ुकराई मिट्टी उठी है
ट़ूटे हो ट़ूटे गुलामी के बन्धन हजार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
आया जमाना हो अपना जमाना
किस्मत का ये रोना-गाना पुराना
बदलेंगे हम अपने जीवन की नदिया की धार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
हर भूखा कहता है यूं ना मरूंगा
मैं जा के मालिक को नंगा करूंगा
ढा दूंगा दुुखियारी लाशों पे उठी दीवार
जागा रे जागा रे जागा सारा संसार
- शंकर शैलेन्द्र