क्रान्ति के लिये उठे कदम
kranti ke liye uthe kadama kranti ke liye uthe kadama krAnti ke liye uThe kadama | क्रान्ति के लिये उठे कदम
क्रान्ति के लिये उठे कदम
शांति के लिये जली मशाल
भूख के विरुध्द भात के लिये
रात के विरुध्द प्रात के लिये
मेहनती गरीब जात के लिये
हम ल़डेंगे हमने ली कसम
क्रान्ति के लिये...
छीन रही है आदमी की रोटियां
बिक रही है आदमी की बोटियां
किन्तु सेठ भर रहे हैं कोठियां
लूट का ये राज हो खतम
क्रान्ति के लिये...
गोलियों की गंध में घुटी हवा
हिंद जेल आग में तपा तवा
खद्दरी सफेद क़ोढ की दवा
खून का ये राज हो खतम
क्रान्ति के लिये...
जंग चाहते हैं आज जंगखोर
ताकि राज कर सकें हरामखोर
पर जवान है जहान है कठोर
डालरों का जोर हो खतम
क्रान्ति के लिये...
- शंकर शैलेन्द्र