जब तक रोटी के प्रश्नों पर
jaba taka roti ke prashnom para jaba taka roti ke prashnom para jaba taka roTI ke prashnoM para | जब तक रोटी के प्रश्नों पर
जब तक रोटी के प्रश्नों पर रखा रहेगा भारी पत्थर
कोई मत ख्वाब सजाना तुम
मेरी गली में खुशी ढूंढ़ते अगर कभी जो आना तुम
कानों के बालियों में टपका हुआ पसीना
सोचो तो इनकी बूंदें मोती हैं या नगीना
रोते नदीया और बिसेसर, जिनका लहु गिरा धरती पर
मेहंदी नहीं लगाना तुम
मेरी गली में...
अपने ही हाथ काट ले ऐसी भी क्या जवानी
मोहताज हो ना जाए आकाश जैसा दानी
जब तक आसूं नहीं मचलते, अंगारों में नहीं बदलते
काजल नहीं लगाना तुम
मेरी गली में...
चंदा के बदले हमको रातें मिली हैं काली
है इस तरफ अंधेरा और उस तरफ दिवाली
जब तक सूरज नहीं उगा लें, चंदा को न वापस पा लें
बिंदीया नहीं लगाना तुम
मेरी गली में... ग्न
इतिहास बेडियों में जक़डा अभी हुआ है
पिंजरे की जिन्दगी का बंदी सुआ हुआ है
जब तक ना ये बंदी छूटें, और बेडियां भी ना ट़ूटें
पायल नहीं बजाना तुम
हंसी खुशी से मुझसे मिलने अगर कभी जो आना तुम...
- छत्तीसग़ढी गीत