धरती को सोना बनाने वाले
dharati ko sona banane vale dharati ko sona banane vale dharatI ko sonA banAne vAle | धरती को सोना बनाने वाले
धरती को सोना बनाने वाले भाई रे
माटी से हीरा उगाने वाले भाई रे
अपना पसीना बहाने वाले भाई रे
उठ, तेरी मेहनत को लूटे हैं कसाई र
धरती को सोना...
मिल, कोठी, कारें, ये स़डकें ये इंजन
इन सब में तेरी ही मेहनत की ध़डकन
तेरे ही हाथों ने दुनिया बनाई
तूने ही भरपेट रोटी ना खाई
ठलुओं ने दुनिया तेरी लूट-लूट खायी रे
धरती को सोना...
मिल-कारखानों में, कोयला खदानों में
खेत-खलिहानों में, सोने की खानों में
बहता है तेरा ही खून-पसीना
जालिम-लुटेरों का पत्थर का सीना
सेठों के पेटों में है तेरी कमाई रे
धरती को सोना...
धरती भी तेरी ये अम्बर भी तेरा
तुझको ही लाना है अपना सवेरा
तू ही अंधेरों में सूरज है भाई
तू ही ल़डेगा सुबह की ल़डाई
तभी सारी दुनिया ये लेगी अंग़डाई रे
धरती को सोना...
- ब्रजमोहन