हाथ कुदाली रे
hatha kudali re hatha kudali re hAtha kudAlI re | हाथ कुदाली रे
हाथ कुदाली रे
ओ भैय्या हाथ कुदाली रे
हाथ कुदाली रे...
बोता है खेतों में जीवन तू ही तो हर साल
किन्तु महाजन हर मौसम में करता तुझे हलाल
दाब महाजन की गर्दन अब चरबी वाली रे
हाथ कुदाली रे...
गर्मी सर्दी आंधी बारिश चाहे हो तूफान
जमींदार के क़ोडे तुझको करते लहू-लुहान
जमींदार की आंखों से अब खींच ले लाली रे
हाथ कुदाली रे...
हाथ हथ़ौडा रे
ओ भैय्या हाथ हथ़ौडा रे
तेरी छाती से ब़ढकर न पर्वत च़ौडा रे
हाथ हथ़ौडा रे...
गला-गला कर लोहे को तू खुद इस्पात बना है
तेरे आगे कोई सीना कब तक भला तना है
हर युग में खूनी जब़डों को तूने त़ोडा रे
हाथ हथ़ौडा रे...
जहरीले सांपों का दुश्मन तू सबसे पहला है
जहरीले सांपों को तूने हर युग में$ कुचला है
जिन्दा अपने दुश्मन को न तूने छोडा रे
हाथ हथ़ौडा रे...
हाथ कुदाली रे...
- ब्रजमोहन