ब़डी-ब़डी कोठिया सजाए पूंजीपतिया
ba़di-ba़di kothiya sajae pumjipatiya ba़di-ba़di kothiya sajae pumjipatiya ba़DI-ba़DI koThiyA sajAe pUMjIpatiyA | ब़डी-ब़डी कोठिया सजाए पूंजीपतिया
ब़डी-ब़डी कोठिया सजाये पूंजीपतिया
कि दुखिया के रोटिया चोराए-चोराए
अपने महलिया में करे उजियरवा
कि बिजुरी के रडवा जराए-जराए
कत्तो बने भिटवा कतहुं बने ग़ढई
कत्तो बने महल कतहुं बने म़डई
मटिया के दियना तूहीं त बुझवाया
कि सोनवा के बेनवा डोलाए-डोलाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
मिलिया में खून जरे खेत में पसीनवा
तबहुं न मिलि हैं पेट भर दनवा
अपनी गोदमिया तूहीं त भरवाया
कि ब़डे-ब़डे बोरवा सियाए-सियाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
राम अउर रहीम के ताके पे धइके लाला
खोई के ईमनवा बटोरे धन काला
देसवा कऽ हमरे तू लूट के खाया
कई गुन दमवा ब़ढाए-ब़ढाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
जेतउ कर काम छोट कहवावे
ऊ बा ब़ड मनई जे जतन बतावे
दस के शसनवा नब्बे पे करवावे
इहे परिपटिया चलाए-चलाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
ज़ुड होई छतिया तनिक दऊ बरसें
अब त महलिया में खुलिहें मदरसें
दुखिया कऽ लरिका प़ढे बदे जइहें
छोट-ब़ड टोलिया बनाए-बनाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
बिनु काटे भिटवा ग़ढइआ न पटिहें
अपनी खुसी से धन धरती न बटिहें
जनता कऽ तलवा तिजोरिया पे लगिहें
कि महल में बजना बजाए-बजाए
ब़डी-ब़डी कोठिया...
- जमुई खां आजाद