मुल्क में हैं आवाजें दो
mulka mem haim avajem do mulka mem haim avajem do mulka meM haiM AvAjeM do | मुल्क में हैं आवाजें दो
एक हमारी, और एक उनकी, मुल्क में हैं आवाजें दो
अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनो, तुम क्या मानो
हम कहते हैं जात-धर्म से इन्सां की पहचान गलत
वो कहते हैं सारे इन्सां एक हैं ये एलान गलत
हम कहते हैं नफरत का जो हुक्म दे वो फरमान गलत
वो कहते हैं ये मानो तो सारा हिन्दुस्तां गलत
हम कहते हैं भूल के नµफरत, प्यार की कोई बात करो
वो कहते हैं खून-खराबा होता है तो होने दो
हम कहते हैं इन्सानों में इंसानों से प्यार रहे
वो कहते हैं हाथों में त्रिशूल रहे तलवार रहे
हम कहते हैं बेघर बेदर लोगों को आबाद करो
वो कहते हैं भूले बिसरे मंदिर-मसजिद याद करो
एक हमारी, और एक उनकी...