गर हो सके तो
gara ho sake to gara ho sake to gara ho sake to | गर हो सके तो
गर हो सके तो अब कोई शम्मा जलाइए
इस दौरे सियासत का अंधेरा मिटाइए
नफरत फैला रहे हैं ये मजहब के नाम पर
सत्ता के भूखे लोगों से मजहब बचाइए
गर हो सके...
जुल्म-ओ सितम की आग लगी है यहां-वहां
पानी से नहीं आग से इसको बुझाइए
गर हो सके...
बस कीजिए आकाश में नारे उछालना
ये जंग है इस जंग में ताकत लगाइए
गर हो सके...
क्यों कर रहे हैं आंधियां रुकने का इंतजार
आइए हमारे कांधे से कांधा मिलाइए
गर हो सके...