चीनो अरब हमारा
chino araba hamara chino araba hamara chIno araba hamArA | चीनो अरब हमारा
चीनो अरब हमारा, हिंदोस्तां हमारा
रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा
खोली भी छिन गयी है, बेंचें भी छिन गयीं हैं
स़डकों पे घूमता है, अब कारवां हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा
चीनो अरब हमारा...
जितनी भी बिल्डिंगें थीं, सेठों ने बांट ली हैं
फुटपाथ बंबई के, ये आशियां हमारा
सोने को हम कलंदर, आते हैं बोरीबंदर
हर एक कुली यहां का, है राजदां हमारा
चीनो अरब हमारा...
तालीम है अधूरी, मिलती नहीं मजूरी
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहा हमाराग्न
चीनो अरब हमारा...
पतला है हाल अपना, लेकिन लहू है ग़ाढा
फौलाद से बना है, हर नौजवां हमारा
मिलजुल के इस वतन को, ऐसा सजायेंगे$ हम
हैरत से मुंह तकेगा, सारा जहां हमारा
चीनो अरब हमारा...
- साहिर लुधियानवी