ऐसी आजादी पे बोलो गर्व क्या कर पायेंगे
aisi ajadi pe bolo garva kya kara payemge aisi ajadi pe bolo garva kya kara payemge aisI AjAdI pe bolo garva kyA kara pAyeMge | ऐसी आजादी पे बोलो गर्व क्या कर पायेंगे
देश-हित के नाम नित मानव उज़ाडे जायेंगे
ऐसी आजादी पे बोलो गर्व क्या कर पायेंगे?
आदिम अगर थे हम कभी, तब भी भले थे आज से
जाग जा रे भोगवादी, हम निचोडे जायेंगे| देश-हित...
चुपचाप सहती ताकती, ये पूछती है प्रकृति
वन वनांचल जीव जीवन, कब तक कुचले जायेंगे? देश-हित...
परदेश के सपने लिये, परदेश के ही पंजे में
देश ना हो गिरवी, कैसे अब बचा हम पायेंगे| देश-हित...
इक तरफ मुट्ठी भरी है, इक तरफ पसरे हैं हाथ
ऐसे बँटवारे जहाँ हों, न्याय कैसे पायेंगे| देश-हित...
अन्याय को जो न्याय मानें, वो करेंगे बस विनाश
हक पे ल़डने वालों पर, वो गोली बम बरसायेंगे| देश-हित...
बाँध लो सर पे कफन, जंजीरें अब टकरा भी दो
आजादी के रास्ते ही आजाद बन्दे जायेंगे| देश-हित...