मशालें लेकर चलना
mashalem lekara chalana mashalem lekara chalana mashAleM lekara chalanA | मशालें लेकर चलना
मशालें लेकर चलना कि जब तक रात बाकी है
संभलकर हर कदम रखना कि जब तक रात बाकी है
मशालें लेकर चलना...
मिले मंसूर को सूली, जहर सुकरात के हिस्से
रहेगा जुर्म सच कहना कि जब तक रात बाकी है
मशालें लेकर चलना...
पसीने की तो तुम छोड़ो, लहू मजदूर का यारों
कि सस्ता पानी सा बहेगा जब तक रात बाकी है
मशालें लेकर चलना...
तेरे मस्तक पे होगा हर पल विद्रोह का निशां
नहीं ये जोश कम होगा कि जब तक रात बाकी है
मशालें लेकर चलना...
अंधेरों की अदालत में, है क्या फरियाद का फायदा
तू कर संग्राम ऐ साथी कि जब तक रात बाकी है
मशालें लेकर चलना...